बैंक वालो की गलती से बने एक अकाउंट के २ मालिक एक पैसे निकालता रहा और दुसरा डालता रहा

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दोस्तों हम सभी से अपनी जिन्दगी में कोई न कोई गलती हर रोज हो ही जाती है. लेकिन बैंक वालो से भी कभी ऐसी गलती होगी पढकर आपके होश उड़ने वाले है. आलमपुर के हुकुम सिंह ने पहली बार बैंक में अकाउंट खुलवाया. हुकुम सिंह ने SBI बैंक में खाता खुलवाया. अब उसी बैंक में एक और हुकुम सिंह आया और उसने भी अपना खाता खुलवाया. बैंक वालो को लगा दोनों एक ही है इसलिए दोनों अकाउंट की एक ही पासबुक जारी कर दी. अब एक हुकुम सिंह शहर मजदूरी करने चला गया और दूसरा घर पर ही रह गया.

शहर में जो हुकुम सिंह मजदूरी कर रहा था वह दिन रात मजदूरी करता और जो पैसा बचता उसे अपने अकाउंट में डाल देता. शहर वाला अपना अकाउंट भर रहा था और गाँव वाले को जैसे पैसे का मेसेज आता वह पैसे निकाल लेता. गाँव वाले हुकुम सिंह को लगने लगा था कि उसके अकाउंट में पैसे मोदी जी डाल रहे है इसलिए उसने पुरे 89 हजार रूपये अपने खाते से निकाल लिए थे. इसके बाद शहर वाला हुकुम सिंह जब गाँव आया और उसने देखा कि उसके अकाउंट में सिर्फ 35 हजार रूपये ही रह गये है तो वह हैरान रह गया. वह बैंक भी गया और वहां जाकर उसने बैंक वालो से पूछताछ की. पहले तो बैंक वालो ने मामले को दबा दिया इसके बाद जैसे कैसे सच सामने आ गया.

हुकुम सिंह के लिए ये बहुत ज्यादा अजीब सी बात लगने लगी कि उसके अकाउंट के २ मालिक बैंक वाले कैसे बना सकते है. हुकुम सिंह शहर में था और गाँव में दूसरा व्यक्ति आराम से उसकी मेहनत के पैसे खर्च किये जा रहा था. उसे लग रहा था कि मोदी जी उसके अकाउंट में पैसे डाल रहे है. लेकिन वह इस बात से अनजान था कि जिन पैसो को वह मोदी द्वारा भेजे हुए पैसे समझ रहा है वास्तव में वे पैसे उसके नही किसी और की मेहनत के है. उसके दिमाग में एक बार भी इस तरह का सवाल नही आया. लोगो को तो बस अपना स्वार्थ ही दीखता है उन्हें इससे क्या मतलब की उनके साथ क्या हो रहा है क्यों हो रहा है.

हुकुम सिंह जैसे इस दुनिया में और भी कई लोग है जिनको अगर कहीं से पैसे मिलते है तो वे खुश हो जाते है और बिना ये सोचते कि ये पैसे उनके पास कहा से आये है वे इन्हें खर्च करना शुरू कर देते है. दुसरो की मेहनत के पैसे को हम युही खर्च कर देते है और हमारा दिल खुश हो जाता है. हमारा दिल ये मानने को तैयार नही होता है कि हम जो कर रहे है वह सही है या गलत है. सच बात तो ये है कि जब किसी इन्सान के पास पैसे आते है तो वह ये मानने को तैयार नही होता कि ये पैसे उसके है या किसी दुसरे व्यक्ति के है. बस हमे तो उस समय पैसे ही दिखाई देते है और उससे मिलने वाली खुशियाँ. पैसो से लोग हर ख़ुशी खरीद सकते है इसलिए सबसे ज्यादा खुश भी पैसो को लेकर ही होते है.