शादी के दौरान आखिर वर-वधु क्यों लेते हैं 7 फेरे? जानिए वजह

96

हिन्दू धर्म के भीतर शादी एक पवित्र बंधन माना जाता है. एक विशेष प्रक्रिया और रस्मो के द्वारा इस बंधन को जोड़ा जाता है. शादी के समय हिन्दू धर्म में सात फेरों की रस्म होती है वहीं साथ साथ सात वचनो की एक रस्म होती है जो कि बेहद महत्वपूर्ण होती है. बहुत कम लोग इन सात वचनो का अर्थ जानते होंगे, इसी लिए आज हम आपको इन सात वचनो के बारे में बताने जा रहे हैं चलिए बताते हैं:-

1. पहला वचन

दरअसल पहले वचन में कन्या वर से यह मांगती है कि अगर वर कभी तीर्थयात्रा करने जाए तो उसे भी अपने साथ ले जाए. अगर वर कोई व्रत-उपवास या अन्य धार्मिक कार्य करे तो आज की भांति ही उसे बायीं ओर बिठा कर रखे फिर कन्या वर से पूछती है कि अगर उसे यह मंजूर है तो वो उनके वामांग में आना स्वीकार करती लेती है.

2. दूसरा वचन

वहीं दूसरे वचन में वधू वर से वचन लेती है कि जिस तरह वर अपने माता-पिता का सम्मान करता हैं, वैसे ही वो उनके भी माता-पिता का सम्मान करें और परिवार की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर के भक्त बने रहें अगर आप ये स्वीकार करते है तो वो पति वामांग में आना स्वीकार करती है.

3. तीसरा वचन

दरअसल कन्या तीसरे वचन में कहती है कि वर उसे वचन दे कि जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) में वर उसका पालन करे अगर वह इसे स्वीकार करता है तो कन्या उसके वामांग में आना स्वीकार कर लेती है.

4. चौथा वचन

बता दें कि वधू चौथे वचन में ये कहती है कि अब आप विवाह के बंध रहे हैं तो ऐसे में परिवार की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति की पूरी जिम्मेदारी आप पर होगी अगर आप इसको संभालने में सक्षम हैं और इसे वहन करने की प्रतिज्ञा लेते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकारती हूं.

5. पांचवा वचन

वहीं अपने होने वाले वर से कन्या परिवार को सुखी रखने के लिए पांचवा वचन लेती है, जिसमें वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाह आदि, लेन-देन और किसी अन्य चीज पर खर्च करते वक्त अगर आप मेरी भी राय लेंगे तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकारती हूं.

6. छठा वचन

आपको बता दें कि कन्या छठवें वचन में मांग करती है कि अगर मैं किसी वक्त अपनी सहेलियों या अन्य महिलाओं के साथ बैठी हूं तो आप किसी के सामने किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे. इसके अलावा आप अपने आपको जुआ या किसी अन्य प्रकार की बुराइयों से दूर रखेंगे. अगर आप यह स्वीकारते हैं तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकारती हूं.

7. सातवां वचन

हालाँकि कन्या आखिरी और सातवें वचन के रूप में वर से यह मांगती है कि वह पराई महिलाओं को अपनी मां सामान समझें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के बीच किसी को भागीदार नहीं बनाएं अगर आप मुझे यह वचन देते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकारती हूं.