कहीं आपके भी घर के मन्दिर में तो नहीं स्थापित है ये 5 मूर्तियाँ ,जो बनती है दुर्भाग्य और विनाश का कारण

2242

हिन्दू धर्म में हर घर में एक छोटा बड़ा पूजा स्थान तो अवश्य ही होता है जिसे हम घर का मन्दिर कहते हैं | उस मंदिर में घर के सदस्यों द्वारा पूजा की जाती हैं ताकि घर में सकारात्मक उर्जा का आगमन हो और सुख-शांति बनी रहें। हिंदु धर्म में मंदिर को घर का आत्‍मा कहा जाता है क्‍योंकि घर में जितनी भी सकारात्‍क उर्जा आती है वह मंदिर के वजह से ही आती है। अत: शास्‍त्रों में वर्णित मंदिर से संबंधित कुछ नियमों का हमें विशेष ध्‍यान रखना चाहिए। वास्‍तु शास्‍त्र में भी घर के मंदिर को विशेष महत्‍व दिया गया है।

हमारे शास्त्रों में घर के  मन्दिर से जुड़ी कई सारी बाते बताई गयी है जिसके अनुसार बताया गया है की घर के मन्दिर में किस देवता की मूर्ति रखना शुभ होता है और किसका अशुभ |आज हम आपको ऐसी ही 4 देवताओं के विषय में बताने वाले है जिनकी मूर्ति हमे भूल से भी अपने घर के मन्दिर में स्थपित नहीं करनी चाहिए वरना ये मूर्तियां  आपके दुर्भाग्य और विनाश का कारण बन  जाती है |

एक भगवान की दो तस्वीर ना रखें :

इस बात का खास ख्याल रखें कि अपने घर के मंदिर में एक हीं भगवान की 2 तस्वीरें गलती से भी ना रखें। और खासकर भगवान गणेश की 3 प्रतिमाएं तो बिल्कुल भी ना रखें। कहा जाता है कि इससे आपके हर शुभ कार्य में अड़चन पैदा होने लग जाती है।

मंदिर का सही स्थान :

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा का स्थान घर के उत्तर या पूर्व दिशा में बनाएं। दक्षिण या पश्चिम दिशा अशुभ फलदाई हो सकता है। घर के मंदिर में दो शंख गलती से भी ना रखें।

नटराजन

नटराजन के बारे में हम सभी परिचित हैं. भगवन शिव के स्वरूप माने जाने वाले नटराजन के बारे में वास्तु शास्त्र कहता हैं की भगवन शिव क्रोध अवस्था में नटराजन का के रूप में आते हैं और फिर तांडव करते हैं. इसका सीधा अर्थ हैं की बहुत शीघ्र विनाश होने वाला है| इससे स्पष्ट हैं की इस प्रकार की मूर्ति को घर में लगाना उचित नही हैं.

शनि देव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी का शनि ग्रह शांत होना चाहिए जिसके लिए शनिदेव की पूजा करनी चाहिये| लेकिन ज्योतिष यह कभी नही कहता की शनिदेव भगवान को घर में लाया जाये| इसका कारण यह है की एकांत, उदासीनता और वैराग्य शनिदेव को अत्यनत प्रिय हैं और घर में जब परिवार रहता हैं तो घर में प्रेम तथा और भी कई चीजे आती हैं, अतः ऐसी मुर्तियो को भी घर में नही लाना चाहिए.

रहू केतु

राहु केतु को भी शनि देव की ही तरह क्रूर ग्रह माना जाता है और राहु और केतु दोनों असुर के शरीर से पैदा हुए हैं, इसलिए इन्हें पाप ग्रह भी माना जाता है भूल से भी इनकी मूर्ति घर के मन्दिर में स्थापित नहीं करनी चाहिए |

भैरव देव की मूर्ति

वैसे तो भैरव देव को भगवान शिव का ही अवतार माना जाता है लेकिन घर के मंदिर में भूल से भी भैरव देव की मूर्ति की स्थापना नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसी मान्यता है की  भैरव देव तंत्र विद्या के देवता हैं और ऐसे में घर के अंदर उनकी उपासना करना अशुभता का संकेत देता है और जिस घर में भैरव देवता की मूर्ति होती है उस घर से मां लक्ष्मी भी रूठ जाती है और कभी मुड़कर नहीं देखती.